Category: Uncategorized
-
मुझको चुनवा दो दीवारों में!
लोग मुझे पागल कहते हैं गलियों में बाज़ारों में।मैंने प्यार किया है मुझको चुनवा दो दीवारों में। नक़्श लायलपुरी
-
इक कली खिल गई एक मुरझा गई!
मौत और ज़िन्दगी क्या हैं इसके सिवा,इक कली खिल गई एक मुरझा गई। नक़्श लायलपुरी
-
नवनिर्माण का संकल्प!
नवगीत आंदोलन के शिखर पुरूष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत आज शेयर कर रहा हूँ| यह गीत एक तरह से सभी रचनाकारों और सजग नागरिकों की तरफ से एक संकल्प गीत है|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत – विषम भूमि नीचे, निठुर व्योम ऊपर! यहाँ राह अपनी बनाने…