Category: Uncategorized
-
कुछ सूखे फूलों के गुलदस्ते!
स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी अपनी किस्म के अनूठे कवि थे| बातचीत के लहज़े में कविता कहने का उनका निराला अंदाज़ था| मैंने पहले भी भवानी दादा की कुछ कविताएं शेयर की हैं|लीजिए आज प्रस्तुत है, हमारे भवानी दादा की यह कविता, जिसमें अभिव्यक्ति का एक अनूठा उदाहरण मिलता है – कुछ सूखे फूलों केगुलदस्तों…
-
खादी गीत
स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की कविता एक बार फिर शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय द्विवेदी जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को उल्लेखनीय वाणी दी थी| लीजिए आज प्रस्तुत है, हमारे स्वाधीनता आंदोलन में खादी की विशेष भूमिका को रेखांकित करने वाली स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की कविता –…
-
बचकर निकलने लगते हैं!
बुरे दिनों से बचाना मुझे मेरे मौला,क़रीबी दोस्त भी बचकर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी
-
धूप पहनकर निकलने लगते हैं!
हसीन लगते हैं जाड़ों में सुबह के मंज़र,सितारे धूप पहनकर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी