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बर्फ़ सी दिल पे गिर रही है अभी!
मैं भी किस वादी-ए-ख़याल में था,बर्फ़ सी दिल पे गिर रही है अभी| अहमद फ़राज़
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ज़ुल्फ़ों में टांकती है अभी!
फ़सले-गुल में बहार पहला गुलाब,किसकी ज़ुल्फ़ों में टांकती है अभी| अहमद फ़राज़
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दूरियों में भी दिलकशी है अभी!
क़ुरबतें* लाख खूबसूरत हों,दूरियों में भी दिलकशी है अभी | *नज़दीकियाँ अहमद फ़राज़
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याद का आसरा!
स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी हिन्दी के एक श्रेष्ठ साहित्यकार थे जिनको पद्मश्री सम्मान तथा अनेक साहित्यिक पुरस्कार प्रदान किए गए थे और उन्होंने बच्चों की पत्रिका ‘पराग’ का कुशल संपादन भी किया था| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का यह गीत – तेरी याद का ले के आसरा,मैं कहाँ-कहाँ से गुज़र गया,उसे…