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रहना था उसको साथ मेरे!
वो हुस्न-ए-नौबहार अबद शौक़ जिस्म सुन,रहना था उसको साथ मेरे, पर नहीं रहा| मुनीर नियाज़ी
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अब मेरे सर पर नहीं रहा!
इस घर में जो कशिश थी, गई उन दिनों के साथ,इस घर का साया अब मेरे सर पर नहीं रहा| मुनीर नियाज़ी
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तेरी आवाज़!
साहिर लुधियानवी साहब शायरी और हिन्दी फिल्मों के लिए गीत लिखने वाले लोगों में एक जाना माना नाम थे| साहिर साहब एक स्वाभिमानी रचनाकार थे और उन्होंने फिल्म जगत में गीतकारों को उचित सम्मान दिलाने के लिए भी उल्लेखनीय काम किया| साहिर साहब के फिल्मी गीत तो पहले भी शेयर किए हैं और आगे भी…
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जिस ओर को दुआर है!
रस्ता न भूलिएगा, दुखों के मकान का,जिस ओर को दुआर है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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सावन की यादगार है!
बैठा है तनहा बाग में, एक बूढ़ा आदमी,सावन की यादगार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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इक तेज घुड़सवार है!
टापें बिछा रही हैं, अंधेरे में जामुनें,इक तेज घुड़सवार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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जिस सोच पर उधार है!
शब्दों की पींग मारते, झूलों का सिलसिला,जिस सोच पर उधार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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इक संगदिल बयार है!
मानेगी क्या उखाड़ के, जड़ से ही अब अरे,इक संगदिल बयार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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इक अजनबी का प्यार है!
सावन चढ़े पड़ोस के, दरिया के शोर में,इक अजनबी का प्यार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त
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बिजली, घटा, मल्हार है!
सावन का इश्तिहार है, उस शोख़ का बदन,बिजली, घटा, मल्हार है, जामुन का पेड़ है। सूर्यभानु गुप्त