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मेरे नाम से जलते क्यों हैं!
मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ,रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं| राहत इन्दौरी
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घर से निकलते क्यों हैं!
लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं| राहत इन्दौरी
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पैमाना कि दिल है मेरा!
जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा,बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं| राहत इन्दौरी
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देखी थी बरसात मुझे होश नहीं!
आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात,मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं| राहत इन्दौरी
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नहीं मालूम कि जाना है कहाँ!
मुझको ये भी नहीं मालूम कि जाना है कहाँ,थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं| राहत इन्दौरी
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कैसे कटी रात मुझे होश नहीं!
कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं,रात के साथ गई बात मुझे होश नहीं| राहत इन्दौरी
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बेटी बेटे!
हमारी हिन्दी फिल्मों के माध्यम से हमको अनेक अमर गीत देने वाले स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का आज एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत फिल्म- बेटी-बेटे में फिल्माया गया| गीत में यही है कि किस प्रकार एक माँ अपने बेटे-बेटी को समझाती है कि आज का दिन तो बीत गया अब हमको कल की…
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हमारा तुम्हारा गगन खो गया!
यह जमीं तो कभी भी हमारी न थी,वह हमारा तुम्हारा गगन खो गया| रामावतार त्यागी