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सुनहरी नाव!
आज बारी है एक पुरानी पोस्ट को दोहराने की, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया…
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मेरी आँखों पे ही क्यों ये तोहमतें !
मेरी आँखों पे ही क्यों ये तोहमतें,अपने बारे में भी सोचा आपने। नक़्श लायलपुरी