Category: Uncategorized
-
बस्ती में ख़ंजर बोलते हैं!
ज़ुबां ख़ामोश है डर बोलते हैं,अब इस बस्ती में ख़ंजर बोलते हैं| राजेश रेड्डी
-
याद तुझको दिलाएं तेरा पैमां जाना!
आज प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| भारतीय उपमहाद्वीप में उर्दू के जो सर्वश्रेष्ठ शायर हुए हैं, उनमें से एक रहे हैं जनाब अहमद फराज़, वैसे तो श्रेष्ठ कवियों/शायरों के लिए सीमाओं का कोई महत्व नहीं होता, लेकिन यह बता दूँ कि फराज़ साहब पाकिस्तान में थे और उनमें इतना साहस था कि उन्होंने वहाँ…
-
मन तुम्हारे गीत गाना चाहता है!
काफी लंबे अंतराल के बाद मैं आज फिर से स्वर्गीय बलबीर सिंह जी ‘रंग’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंग जी अपनी तरह के एक अनूठे कवि थे और अपनी कविताओं और प्रस्तुति के अंदाज़ के कारण उन्होंने काव्य मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई थी| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह जी…
-
पहली सी नहीं, कुछ कम है!
आज भी है तेरी दूरी ही उदासी का सबब,यह अलग बात कि पहली सी नहीं, कुछ कम है| शहरयार
-
ज़्यादा है, कहीं कुछ कम है!
अब जिधर देखिए लगता है कि इस दुनिया में,कहीं कुछ ज़्यादा है, कहीं कुछ कम है| शहरयार
-
यकीं कुछ कम है!
बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फिर होगी,दिल में उम्मीद तो काफी है, यकीं कुछ कम है| शहरयार
-
ये ज़मीं कुछ कम है!
घर की तामीर तसव्वुर ही में हो सकती है,अपने नक्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है| शहरयार
-
अहसास कहीं कुछ कम है!
ज़िंदगी जैसी तवक्को थी नहीं, कुछ कम है,हर घड़ी होता है अहसास कहीं कुछ कम है| शहरयार
-
काट लो रस्ता यही बेहतर!
आज एक बार फिर मैं अपने अत्यंत प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूं| रंजक जी की अनेक रचनाएं मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनको साक्षात सुनने के अनेक अवसर मिले, उनसे प्रशंसा भी प्राप्त की और लंबे समय तक उनसे गीत…