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अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ!
सीनियर बच्चन जी, यानि अमित भइया के पापा स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी ने भी क्या कविता लिख डाली थी- ‘अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ’| दो-दो बार तो लोगों ने इस पर फिल्म बनाई, फिर उसके बाद अब आज की सरकार, जिसने यह जिद पकड़ रखी है कि वो कुछ न कुछ काम करती ही रहेगी| अच्छी सरकार…
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बैठा रहूँ मैं गिरफ्तार सा!
खूबसूरत सी पैरों में ज़ंजीर हो,घर में बैठा रहूँ मैं गिरफ्तार सा| बशीर बद्र
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इस पार, प्रिये मधु है तुम हो!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के गीत शिरोमणि स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी के इस गीत की मुख्य पंक्ति को अक्सर उद्धृत किया जाता है, इसलिए मुझे लगता है कि इसके संबंध में अधिक बताने की आवश्यकता नहीं है| लीजिए प्रस्तुत है बच्चन जी…