Category: Uncategorized
-
क्या क्या जुल्म न ढाया लोगों ने!
हम को दीवाना जान के क्या क्या जुल्म न ढाया लोगों ने,दीन छुड़ाया, धर्म छुड़ाया, देस छुड़ाया लोगो ने| कैफ़ भोपाली
-
जिसमें मिला दो लगे उस जैसा!
आज मैं संतोषानंद जी का एक गीत शेयर करना चाहता हूँ, संतोषानंद जी को मैं लाल किले में राष्ट्रीय दिवसों पर आयोजित कवि-सम्मेलनों के ज़माने से सुनता रहा हूँ, जहां उन दिनों श्री गोपाल प्रसाद व्यास जी आयोजन का संचालन करते थे और जब वे बेटा संतोषानंद कहते हुए उनको आवाज़ लगाते थे तब वे…
-
सजाने को मुसीबत नहीं मिलती!
निकला करो ये शम्अ लिए घर से भी बाहर,तन्हाई सजाने को मुसीबत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
-
वैसे भी फुरसत नहीं मिलती!
हँसते हुए चेहरों से है बाज़ार की ज़ीनत,रोने को यहाँ वैसे भी फुरसत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
-
जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती!
देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद,वो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
-
अपनी भी तबियत नहीं मिलती!
कुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी खफा हैं,हर एक से अपनी भी तबियत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
-
इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती!
दिल में न हो ज़ुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती,खैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
-
शहर अचानक तनहा लगता है!
और तो सब कुछ ठीक है लेकिन कभी-कभी यूँ ही,चलता-फिरता शहर अचानक तनहा लगता है| निदा फ़ाज़ली
-
कुछ दिन ही अच्छा लगता है!
तुम क्या बिछड़े भूल गये रिश्तों की शराफ़त हम,जो भी मिलता है कुछ दिन ही अच्छा लगता है| निदा फ़ाज़ली