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दुनिया-ए-फ़िराक़ में!
उम्मीद का सूरज डूबा है आँखों में अंधेरा छाया है,दुनिया-ए-फ़िराक़ में दिन कैसा रातें ही रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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घिर घिर के बादल!
घिर घिर के बादल आते हैं और बे-बरसे खुल जाते हैं,उम्मीदों की झूटी दुनिया में सूखी बरसातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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दिल से बातें होती हैं!
जब वो नहीं होते पहलू में और लम्बी रातें होती हैं, याद आ के सताती रहती है और दिल से बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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आँखों में अंधेरा!
आशोब-ए-जुदाई क्या कहिए अन-होनी बातें होती हैं,आँखों में अंधेरा छाता है जब उजाली रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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जोश ए जवानी हाय रे हाय!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज एक बार फिर, अपने स्वर में मुकेश जी का गाया एक प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- जोश ए जवानी हाय रे हाय निकले जिधर से धूम मचाए। आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद।
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क़हर की रातें होती हैं!
जिन रातों में नींद उड़ जाती है क्या क़हर की रातें होती हैं,दरवाज़ों से टकरा जाते हैं दीवारों से बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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कैसे-कैसे रूप सलोने
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कैसे-कैसे रूप सलोनेधर संताप मिले,लिए रूप आशीषों काहमको अभिशाप मिले। यह दुनिया है, यहाँ सभी केढंग निराले हैं,भोले लगते प्राणीआफत के परकाले हैं। सोच-समझकर मिलना भाईसब लोगों से तुम जाने कैसा छल कबओढे हुए लिहाफ मिलें। नाट्य मंडली यह दुनियाप्यासी है नोटों कीमंचों के…
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जो तेरे शहर में!
उन्हीं पे सारे मसाइब का बोझ रक्खा है, जो तेरे शहर में ईमान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली
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जो पारसा हो तो!
जो पारसा हो तो क्यूँ इम्तिहाँ से डरते हो,हम ए’तिबार का मीज़ान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली
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हम उस निगाह का!
ये ज़ख़्म-ए-दिल नहीं एहसान की निशानी है,हम उस निगाह का एहसान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली