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अब दिल को ख़ुदा रक्खे!
ख़ुद्दारी-ओ-महरूमी, महरूमी-ओ-ख़ुद्दारी, अब दिल को ख़ुदा रक्खे अब दिल का ज़माना है| जिगर मुरादाबादी
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लाज़िम उन्हें आना है!
मुझको इसी धुन में है हर लहज़ा बसर करना, अब आए वो अब आए, लाज़िम उन्हें आना है| जिगर मुरादाबादी
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मरने का ज़माना है!
ये हुस्न-ओ-जमाल उनका ये इश्क़-ओ-शबाब अपना, जीने की तमन्ना है मरने का ज़माना है| जिगर मुरादाबादी
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इक नक़्श दिखाना है!
तस्वीर के दो रुख़ हैं जाँ और ग़म-ए-जानाँ, इक नक़्श छुपाना है इक नक़्श दिखाना है| जिगर मुरादाबादी
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आईना है शाना है!
ख़ुद हुस्न-ओ-शबाब उनका क्या कम है रक़ीब अपना, जब देखिए अब वो हैं आईना है शाना है| जिगर मुरादाबादी
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और डूब के जाना है!
ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है| जिगर मुरादाबादी
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आज अपना ज़माना है!
या वो थे ख़फ़ा हमसे या हम हैं ख़फ़ा उनसे, कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है| जिगर मुरादाबादी
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ठेकेदार भाग लिया!
प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| मेरा खयाल है कि अशोक चक्रधर जी से तो आप सभी परिचित होंगे| इस कविता में भी एक प्रकार की हड़ताल ही है जिसे मनुष्य नहीं भवन निर्माण जैसे कार्यों में प्रयुक्त होने वाले यंत्र और सामग्री कर रहे हैं,…
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नाज़ुक सा फ़साना है!
आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं, नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है| जिगर मुरादाबादी
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आहों का ज़माना है!
आग़ाज़-ए-मोहब्बत है आना है न जाना है, अश्कों की हुकूमत है आहों का ज़माना है| जिगर मुरादाबादी