Category: Uncategorized
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आज ये किस बात पे रोना आया!
हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको, क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी
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हर इक बात पे रोना आया!
कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया, बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी
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तुझसे मिल कर उदास रहता हूँ!
चंद कलियाँ निशात की चुनकर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ,तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझसे मिल कर उदास रहता हूँ| साहिर लुधियानवी
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सदियों तक यह खेल रचाना है!
हम लोग खिलौना हैं एक ऎसे खिलाड़ी का,जिसको अभी सदियों तक यह खेल रचाना है| साहिर लुधियानवी
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हर मोड़ बहाना है!
क्या जाने कोई किस पर, किस मोड़ पर क्या बीते,इस राह में ऎ राही हर मोड़ बहाना है| साहिर लुधियानवी
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पलक झपकने तक खेल सुहाना है!
एक पल की पलक पर है, ठहरी हुई यह दुनिया,एक पलक झपकने तक हर खेल सुहाना है| साहिर लुधियानवी
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कोई राही समझा है, न जाना है!
यह राह कहाँ से है यह राह कहाँ तक है,यह राज़ कोई राही समझा है, न जाना है| साहिर लुधियानवी
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धुन्ध से आना है, धुन्ध में जाना है!
संसार की हर शै का इतना ही फ़साना है,इक धुन्ध से आना है, इक धुन्ध में जाना है| साहिर लुधियानवी
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चंपा का फूल- रवींद्र नाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…
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झूठ लिक्खें तो ये क़लम टूटे!
तुझ पे मरते हैं ज़िन्दगी अब भी,झूठ लिक्खें तो ये क़लम टूटे| सूर्यभानु गुप्त