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इस आँच में तपना नहीं आता!
दिल को सर-ए-उल्फ़त भी है रुसवाई का डर भी,उसको अभी इस आँच में तपना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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दुनिया में पनपना नहीं आता!
भूले से भी लब पर सुख़न अपना नहीं आता,हाँ हाँ मुझे दुनिया में पनपना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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अलाव!
प्रसिद्ध शायर और फिल्मी गीतकार गुलज़ार साहब की एक नज़्म आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| गुलज़ार साहब अपनी शायरी और फिल्मी गीतों में भी नए-नए प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं| गुलज़ार साहब के लिखे गीत, ग़ज़ल और नज़्में अपना अलग ही मुकाम रखती हैं, एक अलग पहचान उन्होंने हर क्षेत्र में बनाई है|…
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रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए!
घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें,किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए| निदा फ़ाज़ली
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अभी औरों को सताया जाए!
ख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब में,और कुछ दिन अभी औरों को सताया जाए| निदा फ़ाज़ली
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तितली को न फूलों से उड़ाया जाए!
बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं,किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए| निदा फ़ाज़ली
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चिरागों को हवाओं से बचाया जाए!
जिन चिरागों को हवाओं का कोई खौफ़ नहीं,उन चिरागों को हवाओं से बचाया जाए| निदा फ़ाज़ली
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बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाए!
अपना गम लेके कहीं और न जाया जाए,घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाए| निदा फ़ाज़ली
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मेरे साथ है उलझा हुआ सा कुछ!
देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ,हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा कुछ| निदा फ़ाज़ली