Category: Uncategorized
-
ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है!
कुछ इस तरह गुज़ारा है ज़िंदगी को हमने, जैसे कि ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है| राजेश रेड्डी
-
हमीं ने तूफ़ान कर लिया है!
इक दिल के टूटने पर रोता है कोई इतना, झोंके को ख़ुद हमीं ने तूफ़ान कर लिया है| राजेश रेड्डी
-
ज़िंदगी का अरमान कर लिया है!
अक्सर हुआ है मरने की माँग कर दुआएँ, फिर हमने ज़िंदगी का अरमान कर लिया है| राजेश रेड्डी
-
मुसीबतों को मेहमान कर लिया है!
हर बार अपने दिल की बातें ज़बाँ पे लाकर, हमने मुसीबतों को मेहमान कर लिया है| राजेश रेड्डी
-
चलकर नुक़सान कर लिया है!
जिन नेकियों पे चलकर अज्दाद कितने ख़ुश थे. हम ने उन्ही पे चल कर नुक़सान कर लिया है| राजेश रेड्डी
-
ख़ुद को इंसान कर लिया है!
सब लोग इससे पहले कि देवता समझते, हमने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है| राजेश रेड्डी
-
महानगर!
किसी समय हिन्दी गीत का पर्याय रहे स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक लंबी कविता शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी का हिन्दी गीत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की महानगर पर लिखी यह लंबी कविता, जिसमें महानगर के चरित्र का, उसकी खूबियों और…
-
लौटने का सामान कर लिया है!
दुनिया में आँखें खोली हैं मूँदने की ख़ातिर, आते ही लौटने का सामान कर लिया है| राजेश रेड्डी
-
जीना आसान कर लिया है!
आख़िर हटा दीं हमने भी ज़ेहन से किताबें, हमने भी अपना जीना आसान कर लिया है| राजेश रेड्डी