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अगर सिलसिला नहीं करते!
हमें हमारी अनाएँ* तबाह कर देंगी, मुकालमे** का अगर सिलसिला नहीं करते| *Ego, **Dialogue अमजद इस्लाम अमजद
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यूँ दिल बुरा नहीं करते!
जहाँ हो प्यार ग़लत-फ़हमियाँ भी होती हैं, सो बात बात पे यूँ दिल बुरा नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
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रफ़ू से सिला नहीं करते!
वफ़ा की आँच सुख़न का तपाक दो इनको, दिलों के चाक रफ़ू से सिला नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
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फिर से जुड़ा नहीं करते!
ये आइनों की तरह देख-भाल चाहते हैं, कि दिल भी टूटें तो फिर से जुड़ा नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
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मेरा मींजा दिल!
स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ, प्रयोगवाद और नई कविता के दौर में इस तरह की कविताएं भी लिखी जातीं थी इसके एक उदाहरण के रूप में इसे देख लीजिए|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की यह कविता – एक शोर में अगली सीट पे थादुनिया का…
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ज़ख़्म जो दिए हैं भरा नहीं करते!
ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते, जो ज़ख़्म तू ने दिए हैं भरा नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
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सीने पे सो जाओ किसी दिन!
मैं अपनी हर इक साँस उसी रात को दे दूँ, सर रख के मिरे सीने पे सो जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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रात को चमकाओ किसी दिन!
गुज़रें जो मेरे घर से तो रुक जाएँ सितारे, इस तरह मिरी रात को चमकाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन!
ख़ुशबू की तरह गुज़रो मिरी दिल की गली से, फूलों की तरह मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद