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वो दीवाना तो होगा!
कुछ बातों के मतलब हैं और कुछ मतलब की बातें, जो ये फ़र्क़ समझ लेगा वो दीवाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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ऐ दिल अब जाना तो होगा!
डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से, लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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उसने हमको पहचाना तो होगा!
याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा, कल रस्ते में उसने हमको पहचाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता!
ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश-ज़नो ये भी जला डालो, कि सब बे-घर हों और मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर
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अब शजर अच्छा नहीं लगता!
बुलंदी पर उन्हें मिट्टी की ख़ुश्बू तक नहीं आती, ये वो शाख़ें हैं जिनको अब शजर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर
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क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता!
मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है, किसी का भी हो सर, क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर
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रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता, मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर
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सड़क!
एक बार फिर से मैं आज श्री रामदरश मिश्र जी की एक लंबी रचना शेयर कर रहा हूँ| इस कविता में सड़क कवि को ज़िंदगी के किन मुहानों पर ले जाती है, यह महसूस करने लायक है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता – सड़क ने कहा-‘‘चलोगे ?’’‘‘कहाँ ?’’‘‘दायरे से…