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एक सूनी नाव!
आज एक बार फिर मैं अपने समय के लोकप्रिय कवि स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक छोटी सी परंतु अति सुंदर कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की अनेक कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता – एक सूनी नावतट पर लौट…
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सारे रास्तों की याद बचपन में!
लिपट जाती है सारे रास्तों की याद बचपन में, जिधर से भी गुज़रता हूँ मैं रस्ता याद रहता है| मुनव्वर राना
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परिंदा तो वही होता है-
अगर सोने के पिंजड़े में भी रहता है तो क़ैदी है, परिंदा तो वही होता है जो आज़ाद रहता है| मुनव्वर राना
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इसलिए बरबाद रहता है!
भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है, मोहब्बत करने वाला इसलिए बरबाद रहता है| मुनव्वर राना
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इतवार होना चाहिए!
अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दे मुझे, इश्क़ के हिस्से में भी इतवार होना चाहिए| मुनव्वर राना
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घर-बार होना चाहिए!
ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें, टूटा-फूटा ही सही घर-बार होना चाहिए| मुनव्वर राना
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अख़बार होना चाहिए!
ऐरे-ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों, आप को औरत नहीं अख़बार होना चाहिए| मुनव्वर राना
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हमको पार होना चाहिए!
आप दरिया हैं तो फिर इस वक़्त हम ख़तरे में हैं, आप कश्ती हैं तो हमको पार होना चाहिए| मुनव्वर राना
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इश्क़ का इज़हार होना चाहिए!
आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिए, इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए| मुनव्वर राना
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मापदण्ड बदलो!
अत्यंत लोकप्रिय कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी द्वारा आपातकाल में लिखी गई ग़ज़लों के संग्रह ‘साये में धूप’ से अनेक ग़ज़लें शेयर की जाती हैं और मैंने भी की हैं| लेकिन दुष्यंत जी का पारंपरिक जुझारू कविता में भी समान दखल था| मैंने दुष्यंत जी की कुछ कविताएं पहले भी शेयर की हैं, ऐसी ही…