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मंदिर!
लंबे समय के बाद आज फिर से मैं छायावाद युग के प्रमुख कवि स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| प्रसाद जी की अनेक रचनाएं राष्ट्र की धरोहर हैं| इस कविता में ईश्वर के प्रति, आस्था के प्रति प्रश्न उठाने वाले लोगों को प्रसाद जी ने समुचित उत्तर दिया है, भले…
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शम-ए-तरब बुझी नहीं है!
दिल में जो जलाई थी किसी ने, वो शम-ए-तरब* बुझी नहीं है|*Lamp Of Joy अली सरदार जाफ़री
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तख़्लीक़-ए-जुनूँ रुकी नहीं है!
वीरानों से आ रही है आवाज़, तख़्लीक़-ए-जुनूँ रुकी नहीं है| अली सरदार जाफ़री