Category: Uncategorized
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चालें बदल के देखते हैं!
न तुझको मात हुई है न मुझको मात हुई, सो अब के दोनों ही चालें बदल के देखते हैं| अहमद फ़राज़
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क़ालिब में ढल के देखते हैं!
ये क़ुर्ब* क्या है कि यक-जाँ हुए न दूर रहे, हज़ार एक ही क़ालिब** में ढल के देखते हैं |*Nearness, **Body अहमद फ़राज़
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तुझे मुझको जल के देखते हैं!
ये कौन लोग हैं मौजूद तेरी महफ़िल में, जो लालचों से तुझे मुझको जल के देखते हैं| अहमद फ़राज़
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आँखों को मल के देखते हैं!
तू सामने है तो फिर क्यूँ यक़ीं नहीं आता, ये बार बार जो आँखों को मल के देखते हैं| अहमद फ़राज़
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आगे निकल के देखते हैं!
रह-ए-वफ़ा में हरीफ़-ए-ख़िराम कोई तो हो, सो आज अपने आप से आगे निकल के देखते हैं| अहमद फ़राज़
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विसर्जन!
छायावाद युग की कविताओं को शेयर करने के क्रम में आज उस युग की एक प्रमुख कवियित्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| महादेवी जी को उनके सुमधुर गीतों के लिए जाना जाता है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की यह कविता – निशा की, धो देता…
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ज़रा साथ चल के देखते हैं!
जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान-ए-सफ़र, कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं| अहमद फ़राज़
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लहजा बदल के देखते हैं!
अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं, ‘फ़राज़’ अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं| अहमद फ़राज़
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न रोएगा तो मर जाएगा!
ज़ब्त लाज़िम है मगर दुख है क़यामत का ‘फ़राज़,’ ज़ालिम अब के भी न रोएगा तो मर जाएगा| अहमद फ़राज़
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तिरी दहलीज़ पे धर जाएगा!
ज़िंदगी तेरी अता है तो ये जाने वाला, तेरी बख़्शिश तिरी दहलीज़ पे धर जाएगा| अहमद फ़राज़