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शीशे की किरचें!
आज फिर मैं एक वरिष्ठ कवि एवं नवगीतकार श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| किसी समय मैं हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की झारखंड स्थित मुसाबनी माइंस में हिन्दी अधिकारी था और बुदधिनाथ जी हमारे कलकत्ता स्थित मुख्यालय में हिन्दी विभाग में उच्च पद पर थे, इस प्रकार कई बार उनके सानिध्य…
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धूप के लिए!
मेरे मित्र और बड़े भाई जैसे, पटना निवासी वरिष्ठ कवि एवं नवगीतकार श्री सत्यनारायण जी का एक नवगीत आज शेयर कर रहा हूँ| बहुत अरसा हो गया सत्यनारायण जी से मिले, दो बार मैंने उन्हें एनटीपीसी के कवि सम्मेलनों में भी आमंत्रित करके उनके स्तरीय संचालन और सुंदर काव्य पाठ का आनंद लिया था| लीजिए…