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महफ़िल महफ़िल गाएँगे!
तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे, जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनाएँगे| निदा फ़ाज़ली
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उँगलियाँ थाम के खुद!
कल मैंने अपने अग्रज और गुरु तुल्य स्वर्गीय डॉक्टर कुंअर बेचैन जी का जिक्र किया था, उनके बहुत से गीत और कविताएं मैं पहले शेयर की हैं, जब कविता नई नई रुचि पैदा हुई थी तब हम डॉक्टर कुंअर बेचैन जी को बड़े चाव से सुनते थे और अक्सर कवि गोष्ठियों और कवि सम्मेलनों में…
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ज़रा देर को रुलाये मुझे!
बहुत दिनों से मैं इन पत्थरों में पत्थर हूँ, कोई तो आए ज़रा देर को रुलाये मुझे| बशीर बद्र
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अब रेत से उठाए मुझे!
मैं जिसकी आँख का आँसू था उसने क़द्र न की, बिखर गया हूँ तो अब रेत से उठाए मुझे| बशीर बद्र
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हवा से कहो बुझाए मुझे!
अजब चराग़ हूँ दिन रात जलता रहता हूँ, मैं थक गया हूँ हवा से कहो बुझाए मुझे| बशीर बद्र
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तिरा नाम ले के पुकार लूँ!
कई अजनबी तिरी राह में मिरे पास से यूँ गुज़र गए, जिन्हें देखकर ये तड़प हुई तिरा नाम ले के पुकार लूँ| बशीर बद्र
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मैं कभी न गर्द-ओ-ग़ुबार लूँ!
कहीं और बाँट दे शोहरतें कहीं और बख़्श दे इज़्ज़तें, मिरे पास है मिरा आईना मैं कभी न गर्द-ओ-ग़ुबार लूँ| बशीर बद्र
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तिरी बालियाँ तिरे हार लूँ!
अगर आसमाँ की नुमाइशों में मुझे भी इज़्न-ए-क़याम हो, तो मैं मोतियों की दुकान से तिरी बालियाँ तिरे हार लूँ| बशीर बद्र