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भूल जाता हूँ मैं सितम उसके!
भूल जाता हूँ मैं सितम उसके, वो कुछ इस सादगी से मिलता है| जिगर मुरादाबादी
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दिल भी जलाया मैंने!!
आज मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है, यह गीत उन्होंने फिल्म- ‘दिल भी तेरा, हम भी तेरे’ में धर्मेंद्र जी के लिए गाया है, संगीतकार हैं- कल्याणजी आनंदजी, जो उन संगीतकारों में से एक हैं, जिन्होंने मुकेश जी की अनूठी आवाज़ का भरपूर इस्तेमाल किया है। इसके गीतकार हैं- शमीम जयपुरी।…
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शीशे के मकाँ कैसे हैं!
पत्थरों वाले वो इंसान वो बेहिस दर-ओ-बाम, वो मकीं कैसे हैं शीशे के मकाँ कैसे हैं| राही मासूम रज़ा
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मिरे पैरों के निशाँ कैसे हैं!
ऐ सबा तू तो उधर ही से गुज़रती होगी, उस गली में मिरे पैरों के निशाँ कैसे हैं| राही मासूम रज़ा
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ख़ुश्बू के मकाँ कैसे हैं!
जिनसे हम छूट गए अब वो जहाँ कैसे हैं, शाख़-ए-गुल कैसी है ख़ुश्बू के मकाँ कैसे हैं| राही मासूम रज़ा
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मिरे प्यार ने सुलझाए हैं!
ज़िंदगी ढूँढ ले तू भी किसी दीवाने को, उसके गेसू तो मिरे प्यार ने सुलझाए हैं| राही मासूम रज़ा
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लेकिन आग बरसती है!
दिल की खेती सूख रही है कैसी ये बरसात हुई, ख़्वाबों के बादल आते हैं लेकिन आग बरसती है| राही मासूम रज़ा
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ख़्वाब देख डालो, इंक़िलाब लाओ!
ये चराग़ जैसे लम्हे कहीं राएगाँ न जाएँ, कोई ख़्वाब देख डालो कोई इंक़िलाब लाओ| राही मासूम रज़ा