‘कैफ़’ तुझ को दुनिया ने क्या से क्या बना डाला,
यार अब तिरे मुँह पर रंग है न पानी है।
कैफ़ भोपाली
A sky full of cotton beads like clouds
‘कैफ़’ तुझ को दुनिया ने क्या से क्या बना डाला,
यार अब तिरे मुँह पर रंग है न पानी है।
कैफ़ भोपाली
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