देस छुड़ाया लोगों ने!

हम को दिवाना जान के क्या क्या ज़ुल्म न ढाया लोगों ने,
दीन छुड़ाया धर्म छुड़ाया देस छुड़ाया लोगों ने।

कैफ़ भोपाली

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