तुझे हम वली समझते!

ये मसाईल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान ‘ग़ालिब’,
तुझे हम वली समझते जो न बादा-ख़्वार होता|

मिर्ज़ा ग़ालिब

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