एक वक़्त की रोटी खाते!

आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि एवं पूर्व सांसद श्री उदयप्रताप सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

उदय प्रताप जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयप्रताप सिंह जी की यह ग़ज़ल –

एक वक़्त की रोटी खाते आधे हिन्दुस्तानी लोग
काले धन पर फिर कैसे इतराते हैं अभिमानी लोग

लागत से कम दाम पर करते खेती और किसानी लोग
इसे भाग्य का खेल बता कर करते हैं शैतानी लोग

ऊंची कुर्सी पर बैठे जो करते बेईमानी लोग
काश सोचते सरहद पर क्यों देते है क़ुर्बानी लोग

देशप्रेम के छद्म भेष में करते है मन मानी लोग
स्वर्गलोक में रोते होंगे स्वतन्त्रता सैनानी लोग

दिखारहे है संस्कृति की हमको तस्वीर पुरानी लोग
घुमा फिरा कर छिपा रहे हैअपनी कारिश्तानी लोग

संसद में दिखलावे को दिखलाते हैं हैरानी लोग
ऐसे कैसे महलाओं से करते हैं हैवानी लोग

सुबह कई टीवी पर सुनवाते हैं अमृत वाणी लोग
आँखे बंद किये रहते हैं सारे ज्ञानी ध्यानी लोग

मिड डे मील योजना का सुख भोग रहे वरदानी लोग
बच्चे ऐसे जाते जैसे खाते है मेहमानी लोग


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********

Leave a comment