तन्हा-तन्हा दुख झेलेंगे!

अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में निदा फाज़ली साहब की लिखी यह खुबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने बहुत सुंदर ढंग से गाया है-

तन्हा-तन्हा दुख झेलेंगे, महफिल-महफिल गाएंगे!


आशा है आपको यह पसंद आएगी,
धन्यवाद।
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