निगहबानी से मर जाऊँ!

नज़र-अंदाज़ कर मुझ को ज़रा सा खुल के जीने दे,
कहीं ऐसा न हो तेरी निगहबानी से मर जाऊँ|

महशर आफ़रीदी

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