ग़नीमत है परिंदे मेरी तन्हाई समझते हैं,
अगर ये भी न हों तो घर की वीरानी से मर जाऊँ|
महशर आफ़रीदी
A sky full of cotton beads like clouds
ग़नीमत है परिंदे मेरी तन्हाई समझते हैं,
अगर ये भी न हों तो घर की वीरानी से मर जाऊँ|
महशर आफ़रीदी
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