लहू हिना नहीं बनता!

सरिश्क रंग न बख़्शे तो क्यूँ हो बार-ए-मिज़ा,

लहू हिना नहीं बनता तो क्यूँ बदन में रहे|

मजरूह सुल्तानपुरी

Leave a comment