मैं एक शाम चुरा लूँ!

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे,
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे|

क़ैसर-उल जाफ़री

One response to “मैं एक शाम चुरा लूँ!”

  1. One of the finest ghazals.

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