यूँ तो हज़ार दर्द से!

यूँ तो हज़ार दर्द से रोते हैं बद-नसीब,
तुम दिल दुखाओ वक़्त-ए-मुसीबत तो बात है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

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