ज़मीं के हर खिलौने की!

मयस्सर मुफ़्त में थे आसमाँ के चाँद तारे तक,
ज़मीं के हर खिलौने की मगर क़ीमत ज़ियादा थी|

राजेश रेड्डी

Leave a comment