ख़ुश-नवाओ चुप रहो!

तुम को है मालूम आख़िर कौन सा मौसम है ये,
फ़स्ल-ए-गुल आने तलक ऐ ख़ुश-नवाओ चुप रहो|

क़तील शिफ़ाई

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