तिरी महफ़िलों में हूँ!

बदला न मेरे बाद भी मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू,
मैं जा चुका हूँ फिर भी तिरी महफ़िलों में हूँ|

अहमद फ़राज़

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