अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में नीरज जी की हिंदी ग़ज़ल के दो शेर और प्रस्तुत कर रहा हूँ जिनमें इंसानियत का संदेश दिया गया है-
आग बहती है यहाँ गंगा में, झेलम में भी!
आशा है आपको यह पसंद आएगा,
धन्यवाद ।
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