हैरानी नहीं जाती!

कई बार इस की ख़ातिर ज़र्रे ज़र्रे का जिगर चेरा,

मगर ये चश्म-ए-हैराँ जिस की हैरानी नहीं जाती|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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