A sky full of cotton beads like clouds
ये जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम,
तिरा हुस्न दस्त-ए-ईसा तिरी याद रू-ए-मर्यम|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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