जवानी माँगने वाले!

यहाँ तो सब की ख़्वाहिश एक सी है रोटियाँ, सिक्के,

मेरे युग में नहीं ख़्वाब-ए-जवानी माँगने वाले।

मंज़र भोपाली

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