वो ज़ुल्फ़ें साँप हैं !

वो ज़ुल्फ़ें साँप हैं बे-शक अगर ज़ंजीर बन जाएँ,
मोहब्बत ज़हर है बे-शक अगर आज़ार हो जाए|

कैफ़ भोपाली

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