पिंदार-ए-जवानी!

इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा पर नाज़ाँ,
अपने पिंदार-ए-जवानी की परस्तार आँखें|

अली सरदार जाफ़री

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