बे-ज़बाँ हो के भी !

कैफ़ियत दिल की सुनाती हुई एक एक निगाह,
बे-ज़बाँ हो के भी वो माइल-ए-गुफ़्तार आँखें|

अली सरदार जाफ़री

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