ग़ुंचा-ए-दिल पे !

मौसम-ए-गुल में वो उड़ते हुए भौँरों की तरह,
ग़ुंचा-ए-दिल पे वो करती हुई यलग़ार आँखें|

अली सरदार जाफ़री

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