कभी सहमा हुआ सिमटा हुआ!

कभी ठहरी हुई यख़-बस्ता ग़मों की झीलें,
कभी सहमा हुआ सिमटा हुआ इक प्यार आँखें|

अली सरदार जाफ़री

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