अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज में महाकवि जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता की कुछ पंक्तियां अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जो हमारे देश के गौरव से संबंधित हैं और उनके नाटक- चंद्रगुप्त से ली गई हैं-
अरुण यह मधुमय देश हमारा!
आशा है आपको यह पसंद आएंगी,
धन्यवाद।
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