तुम्हारे खत में !

दाग देहलवी जी की लिखी ग़ज़ल जिसे ग़ुलाम अली जी ने गाया है उसके सिर्फ दो शेर अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ-

तुम्हारे खत में नया एक सलाम किसका था!

आशा है आपको यह पसंद आएगा,
धन्यवाद।
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