ऐ मिरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं,
बात होती गुलों तक तो सह लेते हम अब तो काँटों पे भी हक़ हमारा नहीं|
क़मर जलालवी
A sky full of cotton beads like clouds
ऐ मिरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं,
बात होती गुलों तक तो सह लेते हम अब तो काँटों पे भी हक़ हमारा नहीं|
क़मर जलालवी
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