अपने सनम के शैदा!

आलमे दो जहाँ में रोशन हूँ,
फिर मुलाक़ात, क्या करे कोई?
हम तो अपने सनम के शैदा हैं,
होंगे सुक़रात, क्या करे कोई?

बलबीर सिंह रंग

Leave a comment