आलमे दो जहाँ में रोशन हूँ,
फिर मुलाक़ात, क्या करे कोई?
हम तो अपने सनम के शैदा हैं,
होंगे सुक़रात, क्या करे कोई?
बलबीर सिंह रंग
A sky full of cotton beads like clouds
आलमे दो जहाँ में रोशन हूँ,
फिर मुलाक़ात, क्या करे कोई?
हम तो अपने सनम के शैदा हैं,
होंगे सुक़रात, क्या करे कोई?
बलबीर सिंह रंग
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