दूल्हा और घोड़ी !

अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक बहुत पुरानी हास्य कविता का जो अंश मुझे याद है वह अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ-

नए नए दूल्हा थे, नई नई घोड़ी थी!

आशा है आपको यह पसंद आएगी,
धन्यवाद।
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