ज़िंदगी दी है तो!

ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना,
पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़-ए-सफ़र भी देना|

मेराज फ़ैज़ाबादी

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